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शनिवार, जनवरी 12, 2013

मकर संक्रांति के शुभ- पवन पर्व पर करें सूर्य/भास्कर भगवान की आराधना-पूजा और ये उपाय/टोटके----



मकर संक्रांति के शुभ- पवन पर्व पर करें सूर्य/भास्कर भगवान  की आराधना-पूजा और ये उपाय/टोटके----



सभी संक्रान्तियों मे कर्क संक्रान्ति तथा मकर संक्रान्ति का विषेश महत्व धार्मिक तथा वैज्ञानिक दोनो रुपों मे माना जाता है। मकर संक्रान्ति एक मात्र ऐसा पर्व है जो सदैव ही 14 जनवरी को होता है मकर संक्रान्ति का पर्व सौर वर्ष  के आधार पर निर्धारित है।
सूर्य का एक राषि से दूसरी राशि मे प्रवेश की प्रक्रिया संक्रान्ति कहलाती है सूर्य का मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर जाना उत्तरायण तथा कर्क रेखा से दक्षिणी*मकर रेखा की ओर जाना दक्षिणायन कहलाता है उत्तरायण मे दिन बडे तथा रातें छोटी प्रतीत होती हैं धूप मे तेजी तथा षीत मे धीरे-धीरे कमी आने लगती है दक्षिणायन मे यही प्रक्रिया ठीक विपरीत स्थिति मे होती है अर्थात् दिन छोटे और राते बडी प्रतीत होती है यही अंतराल ऋतु परिवर्तन का कारक और कारण है वैसे तो मकर संक्रान्ति सूर्य के संक्रमण का त्यौहार है। पंडित दयानंद शास्त्री(मोब -09024390067) के अनुसार  ऊत्तरायण के समय देवताओं का निवास दिन मे तथा दक्षिणायन मे रात्रि मे होता है। उत्तरायण को देवयान तथ दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता है। कहा जाता है कि मकर संक्रान्ति के दिन किसी भी धार्मिक क्रिया-कलाप मे देवता धरती पर प्रकट होते हैं तथा पुण्यात्मायें शरीर छोडकर स्वर्ग लोक मे जाती हैं।
पंडित दयानंद शास्त्री(मोब -09024390067) के अनुसार सूर्य को यदि वैज्ञानिक दृश्टि से देखा जाय तो सूर्य के मकर राषि मे प्रवेष करते ही अयन बदलता है यही वजह है कि मकर संक्रान्ति को सौम्यायन कहते हैं। सौम्यांयन के प्रारम्भ से ही हेमन्त ऋतु की समाप्ति तथा षिषिर ऋतु का प्रारम्भ हो जाता है। सूर्य सदैव मार्गी रहता है कभी भी अस्त नही होता है। अपनी निर्धारित चाल के साथ सदैव चलता रहता है और अपने निष्चित समय निष्चित राषियों मे पहुंच जाता है। प्रत्येक माह मे सूर्य एक राषि का भ्रमण पूरा कहते है सूर्य जी सदैव गतिषील रहकर १२ राषियों का भ्रमण ०१ वर्श मे पूरा कर लेते हैं। यही कि्रया ऋतु परिवर्तन का कारण बनती है।
मकर संक्रान्ति मे क्या करें***??????
*सूर्य का मकर राषि मे प्रवेश  14 जनवरी ,2013-दोपहर में  दो बजकर बीस मिनट मिनट पर है साथ मे दिन मे ०९ बजकर ०७ मिनट से पंचक भी प्रारम्भ हो जाते हैं। अर्थात् प्रातः काल सूर्योदय क साथ ही पुण्य काल प्रारम्भ हो जायेगा जो अर्धरात्रि तक है।
पंडित दयानंद शास्त्री(मोब -09024390067) के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे से जल का अध्र्य दें। पानी में कुंकुम तथा लाल रंग के फूल भी मिलाएं तो और भी शुभ रहेगा। 
अर्ध्य देते समय ऊँ घृणि सूर्याय नम: मंत्र का जप करते रहें।
१.****मकर संक्रान्ति के पर्व का विधान अत्यन्त सरल है। संक्रान्ति के दिन प्रातः तिल का तेल और उबटन लगाकर स्नान करना चाहिये।
२.****तिल के तेल से मिश्रित जल से स्नान करना चाहिये।
३.****तिल का उबटन लगाना स्वास्थ्य के लिये हितकर है।
४.****तिल से होम करने से तमाम यज्ञों का पुण्य फल प्राप्त होगा।
५.****जल मे तिल डालकर पानी पीना उत्तम है।
६.****तिल से बने पदार्थों का खाना हितकर है तथा सुयोग्य पात्र को तिल का दान करना हितकर है।
विशेष प्रयोग /उपाय----पंडित दयानंद शास्त्री(मोब -09024390067) के अनुसार 
1- जिन लोगों की कुंडली में सूर्य नीच की स्थिति में हो वे लोग यदि मकर संक्रांति के दिन सूर्य यंत्र की स्थापना कर पूजन करें तो इससे उनकी कुंडली के दोष कम होते हैं और विशेष लाभ भी मिलता है। सूर्य यंत्र की स्थापना इस प्रकार करना चाहिए-
मकर संक्रांति के दिन सबसे पहले सुबह उठकर नित्य कर्मों से निपटकर सूर्य देव को प्रणाम करें। इसके बाद सूर्य यंत्र को गंगाजल व गाय के दूध से पवित्र करें। अब इस यंत्र का विधिपूर्वक पूजन करने के बाद सूर्य मंत्र का जप करना चाहिए। मंत्र
ऊँ घृणि सूर्याय नम:।
जप करने के बाद इस यंत्र की स्थापना अपने पूजन स्थल पर कर दें। इस प्रकार इस यंत्र का पूजन करने से शीघ्र ही सूर्य संबंधी होने वाली समस्याएं समाप्त हो जाती हैं।

क्या न करें*****????--पंडित दयानंद शास्त्री(मोब -09024390067) के अनुसार 
१.****अपने अभिभावक पिता का अनादर न करें।
२.****भगवान भास्कर की पूजा अराधना के अवसर पर तिल-गुड, चीनी के लड्डू दान करने की परम्परा है लेकिन सुयोग्य पात्र को ही दान करना हितकर है।
३.****कम्बल तथा शुद्ध  देषी घी का दान गरीब, बेसहारा लोगों को ही करना उत्तम होगा।
४.****सुयोग्य पात्र को ही मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर दान करना चाहिये।
५.****सूर्य देव की उपासना, अराधना तथा सूर्य देव से जुडी किसी भी वस्तु का दान प्रसन्नचित्त होकर तथा प्रसन्न मन से करना चाहिये। तथा भगवान भास्कर का आशीर्वाद आपको तथा आपके  परिवार को प्राप्त होगा।

रविवार, अगस्त 26, 2012

आपकी किस्मत /भाग्य बदल देंगे ये आसन टोटके /तरीके/उपाय---


आपकी किस्मत /भाग्य बदल देंगे ये आसन टोटके /तरीके/उपाय---

अकसर कहा जाता है कि हमारे कर्मों से ही समय बदल सकता है। यदि किसी व्यक्ति के जीवन में बुरा समय चल रहा है तो वह ज्योतिष के अनुसार बताए गए कुछ उपाय अपनाकर उसे अच्छे दिनों में बदल कर सकता है। यहां कुछ छोटे-छोटे उपाय बताए जा रहे हैं, इनमें से यदि कोई एक उपाय भी नियमित रूप से किया जाए तो निश्चित ही आपका बुरा समय अच्छे समय में धीरे-धीरे बदल जाएगा। जन्म कुंडली में कालसर्प योग होने पर व्यक्ति को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस योग के कारण व्यक्ति बैचेन रहता है, मानसिक अशांति बनी रहती है। कार्यों में सफलता नहीं मिलती। पैसों की तंगी बनी रहती है। पारिवारिक सुख नहीं मिल पाता। इससे निपटने के लिए ज्योतिष में कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं...
----यहां बताया गया है कि किस प्रकार बुरे समय को अच्छे समय में बदला जा सकता है-----
----जीवन से जुड़ी सभी समस्याओं को दूर करने वाला यह उपाय शनिवार के दिन किया जाना चाहिए। शनिवार शनि देव का दिन माना गया है। इस दिन शनि के निमित्त विशेष पूजन, दान या धार्मिक कर्म करने से कई प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में है या किसी राशि पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है तो शनिवार के दिन विशेष उपाय करने चाहिए।
---शनिदेव की शुभ दृष्टि प्राप्त करने के लिए किसी भी शनिवार से यह उपाय शुरू करें। इस उपाय के अनुसार आपको लगातार सात शनिवार तक बिना विलंब एक-एक नारियल किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करना है। साथ ही नारियल प्रवाहित करते समय ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जप करें।
-----लगातार सात शनिवार इस प्रकार करने से समस्याओं का प्रभाव कम हो जाएगा और हनुमानजी के साथ ही शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होगी।इसके अलावा प्रति मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। हनुमानजी के भक्तों पर शनिदेव का कुप्रभाव नहीं होता है।
----हर शनिवार को किसी पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाने और सात बार परिक्रमा करने से भी शनि के अशुभ प्रभावों से मुक्ति मिलती है।
----हर शनिवार किसी काले कुत्ते को तेल लगी हुई रोटी खिलाना चाहिए। ज्योतिष के अनुसार कुत्ते को रोटी खिलाने से शनि के दोष शांत होते हैं।
- ---शनिवार के दिन तेल का दान करें। शनि देव के दर्शन करें और शनि मंत्र का जप करें। शनि मंत्र: ऊँ शं शनैश्चराय नम:
- ---प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। मंत्र ऊँ त्र्यम्बकम् यजामहे सुगन्धिम्पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात।।
- ---प्रतिदिन किसी शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित करें। साथ ही ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें।
- ---नियमित रूप से श्रीकृष्ण की पूजा करें और इस मंत्र का जप करें। मंत्र: ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम:
- ---किसी शुभ मुहूर्त में चांदी का नाग का जोड़ा बनवाएं और उसकी पूजा करके किसी पवित्र नदी में श्रद्धापूर्वक प्रवाहित करें।
-----शनिवार के दिन काले घोड़े की नाल का छल्ला मध्यमा अंगुली यानी मीडिल फिंगर में पहनें। इससे भी शनि दोष शांत होता है।
----प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और बिल्व पत्र अर्पित करने चाहिए। ऐसा करने पर शनि के दोषों से मुक्ति मिलती है।
----समय-समय पर गरीब लोगों को काले कंबल का दान करना चाहिए। शनि देव गरीबों की मदद करने वाले लोगों से विशेष स्नेह रखते हैं और उन्हें कष्ट नहीं देते हैं।
-----शास्त्रों के अनुसार गाय, पक्षी, कुत्ता, चींटियां और मछली से हमारे जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से गाय को रोटी खिलाएं तो उसके ज्योतिषीय ग्रह दोष नष्ट हो जाते हैं। गाय को पूज्य और पवित्र माना जाता है, इसी वजह से इसकी सेवा करने वाले व्यक्ति को सभी सुख प्राप्त हो जाते हैं। इसी प्रकार पक्षियों को दाना डालने पर  आर्थिक मामलों में लाभ प्राप्त होता है। व्यवसाय करने वाले लोगों को विशेष रूप से प्रतिदिन पक्षियों को दाना अवश्य डालना चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति दुश्मनों से परेशान हैं और उनका भय हमेशा ही सताता रहता है तो कुत्ते को रोटी खिलाना चाहिए। नियमित रूप से जो कुत्ते को रोटी खिलाते हैं उन्हें दुश्मनों का भय नहीं सताता है। कर्ज से परेशान से लोग चींटियों को शक्कर और आटे डालें। ऐसा करने पर कर्ज की समाप्ति जल्दी हो जाती है।जिन लोगों की पुरानी संपत्ति उनके हाथ से निकल गई है या कई मूल्यवान वस्तु खो गई है तो ऐसे लोग यदि प्रतिदिन मछली को आटे की गोलियां खिलाते हैं तो उन्हें लाभ प्राप्त होता है। मछलियों को आटे की गोलियां देने पर पुरानी संपत्ति पुन: प्राप्त होने के योग बनते हैं।
-----वास्तु अनुसार पैसा रखने से आपका धन सुरक्षित रहेगा, साथ ही उसमें बरकत भी बनी रहेगी। परिवार के आय के स्रोतों में बढ़ोतरी होती है।वास्तु के अनुसार धन के देवता कुबेर का स्थान उत्तर दिशा में माना गया है। उत्तर दिशा में कुबेर के प्रभाव से धन की सुरक्षा होती है और समृद्धि बनी रहती है। इसका मतलब यही है कि हमें अपने नकद धन को उत्तर दिशा में रखना चाहिए। हर व्यक्ति के लिए नकद धन के लिए अलग कमरा बनवाना संभव नहीं है। कुछ लोगों के यहां ही पैसा रखने के लिए अलग कमरे की सुविधा उपलब्ध रहती है। जिन लोगों के यहां पैसा रखने के लिए अलग कमरा नहीं है वे अपना धन उत्तर दिशा के किसी भी कमरे में रख सकते हैं। ध्यान रखें कमरा पूरी तरह सुरक्षित हो और वहां चोरी आदि का भय नहीं होना चाहिए। धन को इस स्थान पर रखने से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।धन को उत्तर दिशा में रखना चाहिए और रत्न, आभूषण आदि दक्षिण दिशा में रखना चाहिए। इसके पीछे यह कारण है कि नकद धन आदि हल्के होते है, इसलिए इन्हें उत्तर दिशा में रखना वृद्धिदायक माना जाता है। जबकि रत्न आभूषण में वजन और मूल्य अधिक होता है, इसलिए ये चीजें विशेष स्थान पर ही रखी जा सकती है। इन चीजों के लिए तिजोरी या अलमारी श्रेष्ठ रहती है और ये काफी भारी होती है। भारी सामान रखने के लिए दक्षिण दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। अत: रत्न और आभूषण को दक्षिण दिशा में रखा जा सकता है।